राजस्थान के दौसा जिले में नकली भारतीय मुद्रा का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है। पुलिस ने 500 रुपए के नकली नोट छापने वाली फैक्टरी का पर्दाफाश करते हुए गिरोह के सरगना समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक किशोर को निरुद्ध किया गया है। कार्रवाई में 24.84 लाख रुपए के नकली नोट और नोट छापने का पूरा सेटअप बरामद किया गया।
कैसे हुआ खुलासा
एसपी पीयूष दीक्षित ने बताया कि 28 मई को पुलिस ने 40 हजार रुपए के नकली नोटों के साथ एक आरोपी को पकड़ा था। पूछताछ में एक किशोर से 47 हजार रुपए के नकली नोट मिले। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस अंतरराज्यीय गिरोह तक पहुंच गई और विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों व खुफिया सूचनाओं के आधार पर हरियाणा के फरीदाबाद में दबिश दी।
फैक्टरी से बरामदगी
पुलिस ने मौके से 500-500 रुपए के 4,968 नकली नोट बरामद किए। इसके अलावा 11 हाई-क्वालिटी प्रिंटर, दो लैपटॉप, छह पेपर रोल, केमिकल, ब्रश, कटर, वाटरमार्क डाई और विशेष कागज भी जब्त किए गए।
गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों में दौसा निवासी आयुष कुमार मीना (19), फरीदाबाद निवासी संतोष सिंह वाल्मीकि (33) और झारखंड निवासी विशाल उपाध्याय (42) शामिल हैं। एक किशोर को भी निरुद्ध किया गया है। सभी से पूछताछ जारी है।
अजमेर और किशनगढ़ कनेक्शन
पुलिस ने बताया कि नकली नोटों का नेटवर्क अजमेर और किशनगढ़ तक फैला हुआ है। मदनगंज थाना पुलिस ने नितेश रावत, अजय मीना और नवीन कोमल रेगर को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां उन्हें तीन दिन के रिमांड पर सौंपा गया। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य संपर्कों और नेटवर्क की तलाश कर रही है।