भारतीय रुपये ने शुक्रवार को विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जोरदार रिकवरी दर्ज की। यह पिछले दो महीनों में रुपये की एक दिन में सबसे बड़ी छलांग है। कारोबार के अंत में रुपया 0.73 प्रतिशत की मजबूती के साथ 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। इस तेजी के पीछे मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का संभावित हस्तक्षेप माना जा रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली ताकत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 2 प्रतिशत गिरकर 91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम समझौते की संभावना बढ़ने से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सुचारू होने की उम्मीद है। सप्लाई चेन सुधरने की इस संभावना ने तेल के दाम नीचे धकेले, जिससे भारत को राहत मिली और रुपये को मजबूती मिली।
रिजर्व बैंक का साइलेंट एक्शन
विदेशी मुद्रा डीलरों का मानना है कि रुपये की गिरावट को थामने में RBI की भूमिका अहम रही। सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई के निर्देश पर सरकारी बैंकों ने बाजार में भारी मात्रा में डॉलर बेचे। इस कदम से डॉलर की मांग का दबाव कम हुआ और रुपये को 95.70 के पिछले बंद स्तर से उठकर 95 तक पहुंचने में मदद मिली। यह 8 मई के बाद रुपये का सबसे मजबूत स्तर है।
एशिया में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन
शुक्रवार का दिन भारतीय मुद्रा के लिए ऐतिहासिक रहा। इस उछाल के साथ रुपया एशिया में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया। दूसरे स्थान पर थाईलैंड की मुद्रा ‘थाई बात’ रही, जिसमें 0.37 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। हालांकि घरेलू शेयर बाजार में निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी 50 में लगभग 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई। वहीं, देश का विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 681 अरब डॉलर पर आ गया है, जो एक साल से अधिक का निचला स्तर है।